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Wednesday, January 18, 2017

मंदार तुझे शत बार नमन


नरेश जनप्रिय  

मंदार तुझे शत बार नमन ।
एक शिलाखंड अवतार नमन॥

अति गरिमामयी तेरा अतीत
तेरी वेद-पुराण में भरी कथा ।
समस्त देवों के हित तूने
मथनी बनकर सागर को मथा ॥
तेरे ही श्रम से, हे मंदार !
निकले समुद्र से चौदह रतन । 
मंदार तुझे शत बार नमन॥

तुम सब धर्मों के केंद्र स्थल
अनगिनत कुंड तेरी गर्दन पर । 
हो जाते धन्य-धन्य मानव
तेरे पावन भाल का दर्शन कर॥
सृष्टि के मूक गवाह को पा
आह्लादित बांका का कण-कण । 

मंदार तुझे शत बार नमन॥

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